श्री रामझरोखा कैलाश धाम — एक दिव्य-भव्य दृष्टि
लगभग पचहत्तर वर्ष पूर्व संत शिरोमणि परम पूजनीय श्री सियाराम जी महाराज ने सुजानदेसर (गंगाशहर), बीकानेर में श्री रामझरोखा कैलाश धाम की स्थापना की थी। महा मनीषी के पुण्य प्रताप से यह आश्रम सनातन ऊर्जा और युवा चेतना का केंद्र बन गया। महाराज श्री के तपोबल और साधना से यह आध्यात्मिक धाम अद्भुत दिव्यता और आलोक से आलोकित हुआ। इस आश्रम में प्रवेश करते ही मन में स्वतः शांति और आध्यात्मिक अनुभूति का संचार होने लगता है।
तत्पश्चात परम पूज्य गुरु महाराज श्री श्री 1008 महंत श्री रामदास जी महाराज महात्यागी जी ने इस धाम की सनातन परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा को अक्षुण्ण रखते हुए इसे आगे बढ़ाया। उन्होंने निरंतर यज्ञ, हवन, पूजन, रामायण-पाठ और कीर्तन जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का महान कार्य किया।
संत शिरोमणि श्री सियाराम जी महाराज ने इस तपोभूमि में गौशाला का पावन कार्य भी प्रारंभ किया। आगे चलकर सन् 2010 में गुरु महाराज जी द्वारा गणेश यज्ञ तथा सन् 2013 में सूर्य यज्ञ का आयोजन किया गया। साथ ही लगभग एक वर्ष तक भगवान सूर्य नारायण को साक्षी मानकर सूर्योपासना का कठोर तप किया गया। आज इस आश्रम की महिमा और आभा चारों दिशाओं में प्रसारित हो चुकी है।
वर्तमान समय में इस आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी सरजूदास जी महात्यागी जी हैं। सन्म 2016 के सिंहस्थ महाकुंभ में वे भारतवर्ष के इतिहास में अब तक के सबसे कम आयु के महामण्डलेश्वर बने। आपने इस आश्रम को एक नया स्वरूप प्रदान किया है। आपकी अखण्ड साधना, तपश्चर्या और लोककल्याणकारी भावना के फलस्वरूप सन् 2023 में संपन्न 108 कुंडिय श्रीरामचरितमानस महायज्ञ एवं श्रीराम कथा में आपको राष्ट्रीय संत की उपाधि से विभूषित किया गया।
वर्तमान में आप पीठाधीश्वर श्रीरामझरोखा कैलाशधाम बीकानेर एवं सीताराम महावीर बाग, त्यागी बाबा आश्रम, बहुलावन बाटी, मथुरा एवं
श्री सियाराम जी गौशाला के अध्यक्ष, अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय मंत्री, अखिल भारतीय संत समिति राजस्थान के संरक्षक तथा सर्व साधु सेवा समिति बीकानेर के अध्यक्ष भी हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि आपने निरंतर 18 वर्षों तक अखण्ड तप-साधना की है और इस अल्प आयु में तप एवं साधना के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
आपके द्वारा पंच धूणी, द्वादश धूणी, चौरासी धूणी, कोटि धूणी और कोट-खप्पर धूणी जैसे कठोर तप संपन्न किए गए हैं। आपके आध्यात्मिक नेतृत्व में आज यह आश्रम सेवा, संस्कार, सनातन और वैदिक संस्कृति का एक अद्वितीय और प्रेरणादायक केंद्र बन चुका है। यहाँ आने वाला प्रत्येक धर्मपरायण व्यक्ति अपने आप को धन्य अनुभव करता है।
महाराज श्री के तपोबल और सेवा का विस्तार इतना व्यापक है कि मानव कल्याण के साथ-साथ सभी जीवों के प्रति करुणा का भाव भी उनके जीवन का आधार बन गया है। गौसेवा, आरोग्य सेवा और कन्या विवाह जैसे सेवा कार्य उनके जीवन के प्रमुख ध्येय हैं। गाय और गोचर भूमि की रक्षा के लिए महाराज श्री सदैव तत्पर रहते हैं और जनमानस में इसके प्रति अद्भुत जागरूकता भी जगाई है।
महाराज श्री के अथक प्रयासों से बीकानेर विकास प्राधिकरण के नियंत्रण में आई समस्त गोचर भूमि अब मुक्त हो चुकी है। उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व और तपोबल के कारण यह पुण्य कार्य संभव हुआ। यही नहीं, गोचर भूमि संरक्षण समिति का नेतृत्व भी महाराज श्री को सौंपा गया है।
हाल ही में बीकानेर में चल रहे खेजड़ी बचाओ महापड़ाव में भी महाराज श्री की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी दिव्य वाणी और सकारात्मक दृष्टिकोण से राज्य सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सार्थक संवाद हुआ और समाधान की दिशा में मार्ग प्रशस्त हुआ।
महाराज श्री का त्याग, समर्पण और तप अत्यंत प्रेरणादायक है। ऐसा प्रतीत होता है मानो ऐतरेय ब्राह्मण का “चरैवेति चरैवेति” और कठोपनिषद का “उत्तिष्ठत जाग्रत” का संदेश उनके रोम-रोम में समाहित हो।
चाहे पर्यावरण संरक्षण का कार्य हो, गोवंश की रक्षा, गोचर और ओरण बचाने का अभियान, या संस्कार और सनातन संस्कृति की रक्षा — महाराज श्री दिन-रात कर्मयोगी की भाँति अपने ध्येय में निरंतर समर्पित रहते हैं।
